भारतीय सीमा सुरक्षा बल को सशक्त बनाने के लिए भारतीय रक्षा मंत्रालय द्वारा लिया अहम फैसला

भारतीय सीमा सुरक्षा बल , प्रत्येक राष्ट्र के लिए अपनी सुरक्षा के मायने विशिष्ट होते हैं ,और प्रत्येक राष्ट्र अपने राष्ट्र की सीमा की सुरक्षा ओं की निगरानी के लिए चौक चौकशी की व्यवस्था निरंतर करता रहता है। प्रत्येक राष्ट्र के लिए अपनी सुरक्षित सीमाएं देश के अंदर शांति एवं प्रभुत्व प्रभुता को बढ़ाती है। इसीलिए प्रत्येक देश अपनी देश की सीमा सुरक्षा मैं किसी भी प्रकार से कोताही नहीं बरतना क्योंकि अगर हमारे राज्य की सीमाएं सुरक्षित है, तो हमारा राष्ट्र सुरक्षित है, और हमारा राष्ट्र सुरक्षित है तो हम सुरक्षित हैं, किसी विचारधारा पर चलने वाला हमारा राष्ट्र एक धर्मनिरपेक्ष एवं सर्वभौमिक तरीके से अपने पड़ोसी राज्यों के साथ काफी अच्छे संबंध बनाए हुए हैं। और आज वर्तमान में जो भारत की प्रभुता है, यह संपूर्ण विश्व इस से भलीभांति परिचित है,कि भारत एक शांतिप्रिय देश है।

भारतीय सीमा सुरक्षा बल को सशक्त बनाने के लिए भारतीय रक्षा मंत्रालय द्वारा लिया अहम फैसला यहां समय आधुनिकता से परिपूर्ण है, और यहां पर हमारे देश की सुरक्षा के लिए भी कई आधुनिक हथियारों का उपयोग किया जाता है। वर्तमान समय में ड्रोन का उपयोग भी हमारे देश की सीमा सुरक्षा एवं निगरानी हेतु किया जा रहा है। इस हेतु सरकार ने एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। जिसके अनुसार हमारी देश की सीमाओं की रक्षा के लिए एक बड़ी संख्या में ड्रोन खरीदे जाएंगे, जो सीमा पर हमारे देश की रक्षा करें एवं निगरानी करेंगे।

A-SADS का एक परिचय

A-SADS एक विशिष्ट परिष्कृत सिस्टम है, जो खास तौर पर अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में निगरानी एवं सुरक्षा की दृष्टि से तैनाती के लिए डिजाइन किए गए हैं, ये ड्रोन निगरानी, फोटो लेने, टार्गेट ढूंढने और आक्रमण करने में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करते हैं।

A-SADS की विशिष्ट तकनीकी कौशल को बताते हुए , बी एस ए Bhara के प्रिंसिपल एडवाइजर (टेक्नोलॉजी) डॉ. मैत्रेयी नंदा ने कहा कि, A-SADS सिस्टम में अत्याधुनिक तकनीकी क्षमताओं की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल है, जिसमें कुशल मिशन निष्पादन की सुविधा के लिए ड्रोन के बीच स्वतंत्र रूप से निगरानी करते हुए टारगेट देखने पर फोटो लेकर उचित निर्णय लेने के लिए बुद्धिमान एल्गोरिदम के साथ स्वार्म इंटेलिजेंस शामिल है। इन प्रणालियों में स्वायत्तशासी नेविगेशन और उड़ान क्षमताएं होती हैं, जिससे ऑपरेटर का कार्य दबाव कम होता है और मिशन को सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा सकता है।

सशक्त सुरक्षा बल के लिए A-SADS क्यों इतना महत्वपूर्ण है

BSADS Bharat Armed Drone Swarms: देश की सुरक्षा को लेकर जो चुनौतियों है, उनसे से निपटने के अपने अत्यधिक सक्रिय कार्यक्षमता (एक्टिव प्रोसेस) के रूप में भारतीय सेना (Indian Army) विभिन्न क्षेत्रों में अपने सुरक्षा ऑपरेशनल क्षमताओं को बढ़ाने के लिए लगातार विशिष्ट तकनीकों की तलाश कर रही है। सुरक्षा सेना बल ने इसके लिए अत्यधिक आधुनिक परिस्थिति को देखते हुए निर्णय लेने में अति तीव्र तथा खुफिया जानकारी को एकत्र करने की क्षमता और मारक क्षमताओं को हासिल करने में विशिष्टता को देखते हुए , ड्रोन झुंडों की विशाल क्षमता को भी स्वीकार किया है।

भारतीय रक्षा मंत्रालय द्वारा भारतीय सीमा सुरक्षा बल के लिए रक्षा सौदा :

रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defense) ड्रोनों की खरीद के लिए सेना ने पहले ही इंडस्ट्री से प्रपोजल मंगाने के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट जारी किया था। जिसमें खरीद में न्यूनतम 50 फीसदी स्वदेशी सामग्री की अनिवार्यता रखी गई थी ड्रोन झुंड (A-SADS). ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए निगरानी एवं सुरक्षा की दृष्टि से तैयार किया गया, ड्रोन झुंड (A-SADS) की खरीदारी के इस सौदे के लिए ब्रह्मशिरा एस्ट्रा भारत प्राइवेट लिमिटेड को चुना है। जो कि दिल्ली की सब से अग्रणी रक्षा और एयरोस्पेस कंपनी है।

इंडस्ट्री से मिले प्रपोजल के व्यापक मूल्यांकन के बाद, बीएसए भारत नोएडा में अपनी प्रोडक्शन फेसिलिटी के साथ, सशस्त्र Armed Drone Swarms की खरीद के लिए पसंदीदा विकास-सह-उत्पादन एजेंसी के रूप में उभरा है। नोएडा की यह कंपनी मुख्य रूप से सुविधा उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों के अनुसंधान, विकास और उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

1. प्रस्ताव का नाम झुंड ड्रोन(Autonomous Surveillance and Armed Drone Swarm (A-SADS) for Desert/ Plains.)

2 .रेगिस्तान/मैदानों के लिए स्वायत्त निगरानी और सशस्त्र ड्रोन झुंड (ए-एसएडीएस)।

3. संक्षिप्त विवरण

(ए) सेना दिवस के दौरान प्रदर्शित ड्रोन के झुंड ने भारतीय सेना को स्वदेशी झुंड प्रौद्योगिकी क्षमता के लिए वैश्विक परिदृश्य पर पेश किया। इसमें शामिल प्रौद्योगिकियों की तरल अवस्था के कारण ड्रोन झुंड दुनिया भर में अनुसंधान एवं विकास के विभिन्न चरणों में हैं। हालाँकि, उन्हें अभी तक सैन्य कार्यों के लिए तैनात नहीं किया गया है। हाल के दिनों में किए गए बड़े पैमाने पर ड्रोन हमलों को ड्रोन द्वारा हमला नहीं माना जाना चाहिए। ड्रोन झुंड में लीडर के रूप में सभी ड्रोन के साथ, प्रत्येक ड्रोन स्वतंत्र और स्वायत्त है जिसमें व्यक्तिगत और सामूहिक कार्यों को पूरा करने की क्षमता है।

(बी) जमीनी युद्धाभ्यास बलों के साथ मिलकर काम करने वाले ड्रोन का एक समूह आक्रामक और रक्षात्मक दोनों अभियानों के दौरान हवाई युद्धाभ्यास क्षमता प्रदान करेगा, जिससे जमीनी बलों की युद्ध क्षमता में वृद्धि होगी। नियोजित संख्या दुश्मन ताकतों पर भारी पड़ेगी, रोजगार का लचीलापन प्रदान करेगी और अनुकूल लागत के साथ जीवित रहने की क्षमता में वृद्धि करेगी और सामरिक युद्ध क्षेत्र में परिचालन प्रभुत्व हासिल करेगी।

4.परिचालन औचित्य

(ए) युद्धक्षेत्र का आकार ड्रोन झुंडों से काफी प्रभावित हो सकता है, जिससे शुरुआत में मशीनीकृत बलों के निर्णायक स्तंभों के संरक्षण और स्वयं के चयन के स्थान और समय पर आवेदन की अनुमति मिलती है। यदि सही समय और स्थान मैट्रिक्स में लागू किया जाए, तो यह अनुपात से बाहर लाभांश प्राप्त कर सकता है। इसलिए, इस आला प्रौद्योगिकी के लाभों को प्राप्त करने की दिशा में सभी प्रयासों को निर्देशित करने की आवश्यकता है।

(बी) सामर्थ्य, लचीली रोजगार क्षमता, अतिरेक, सटीकता, सॉफ्टवेयर प्रभुत्व, मिशन लागत में कमी, दृष्टि रेखा से परे (बीएलओएस) हमले की क्षमता और मानव हताहतों के जोखिम के अंतर्निहित लाभ स्वार्म ड्रोन को पारंपरिक और गैर-पारंपरिक संचालन में रोजगार के लिए एक शक्तिशाली विकल्प बनाते हैं।

5. अनुमानित मात्रा 900 ड्रोन (75 ड्रोन झुंड के 05 x मिशन )

6, शक्ति. आईसी इंजन/बैटरी/हाइब्रिड

संचालन की ऊंचाई. 5000 मीटर एएमएसएल तक

परिचालन ऊंचाई 01 किमी तक एजीएल

संचालन की सीमा 50 किलोमीटर तक

ड्रोन का वजन 5 किलोग्राम

7. स्वदेशी सामग्री
खरीद की भारतीय आईडीडीएम श्रेणी के अनुसार 50%

मेक-II के लिए.

8. अतिरिक्त जानकारी. यह एक विशिष्ट तकनीक है जिसके लिए सेवाएँ हैं

पिछले दो वर्षों से स्वदेशी उद्योग, ज्यादातर एमएसएमई के साथ, अपनी भूमिका और रोजगार दर्शन की विशिष्टता के रूप में, अनुसंधान एवं विकास का कार्य कर रहे हैं। एक राष्ट्र के रूप में शीघ्र अपनाने के लिए इस प्रौद्योगिकी का डिज़ाइन और विकास शुरू करने का उपयुक्त समय। डी एंड डी में पीएसओ जारी करने, प्रोटोटाइप विकास और परीक्षण सहित दो साल से अधिक का समय लगेगा। कई कंपनियों ने पहले ही इस तकनीक में निवेश करना शुरू कर दिया है और इस मामले को आगे बढ़ाने के लिए उनके पास पर्याप्त क्षमता मौजूद है।

भारतीय सीमा सुरक्षा बल और होगा अधिक सशक्त

एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के इंडिया प्रिंसिपल एडवाइजर (पॉलिसी) के पूर्व सीएमडी वी पी अग्रवाल ने इस BSA Bharat को चुने जाने की सराहना करते हुए कहा की, भारतीय सीमा सुरक्षा बल को सशक्त बनाने के लिए भारतीय रक्षा मंत्रालय द्वारा यह बहुत ही अहम और महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है, और जो देश के लिए बहुत अच्छा साबित होगा।

जानकारी हेतु इस आधिकारिक वेबसाइट पर आप जा सकते हैं – भारत सरकार

देश और विदेशों की ताजा जानकारियों के लिए आप देख सकते हैं – Official website

क्या आप जानते हैं –

विश्व का सबसे बड़ा सुरक्षा बल कौन सा है?

संक्षेप में बीएसएफ, (BSF) भारत का एक प्रमुख अर्धसैनिक बल है एवं विश्व का सबसे बड़ा सीमा सुरक्षा बल है।

भारतीय सुरक्षा बल का गठन कब हुआ था?

भारतीय सुरक्षा बल का गठन 1 दिसम्बर 1965 में हुआ था। 1 दिसंबर सीमा सुरक्षा बल दिवस मनाया गया।

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